संत गुरु रविदास
पाठ्यक्रम: GS1/इतिहास
संदर्भ
- संत गुरु रविदास की 649वीं जयंती के उपलक्ष्य में आदमपुर हवाई अड्डे का नाम बदलकर श्री गुरु रविदास जी एयरपोर्ट, आदमपुर रखा गया।
परिचय
- गुरु रविदास 15वीं और 16वीं शताब्दी के भक्ति आंदोलन के एक पूज्य संत थे, जो एकता, भक्ति और मानवता की सेवा के अपने सशक्त संदेश के लिए जाने जाते हैं।
- उन्हें रविदासिया धर्म का संस्थापक माना जाता है।
जीवन और शिक्षाएँ
- वे जाति-आधारित भेदभाव के कट्टर विरोधी थे और वंचित समुदायों के उत्थान के लिए निरंतर कार्य करते रहे।
- उन्होंने मानव समानता, प्रेम और भाईचारे के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया, जो धार्मिक एवं सामाजिक बाधाओं से परे थे।
- उन्होंने ‘बेगमपुरा’ नामक समाज की कल्पना की—एक ऐसा नगर जहाँ न दुःख हो, न भय और न भेदभाव।
- उन्होंने समाज को ‘कर्म’ का व्यापक संदेश दिया, जिसे उन्होंने लोकप्रिय कहावत “मन चंगा तो कठौती में गंगा” के माध्यम से व्यक्त किया।
विरासत
- उनके भक्ति पदों को गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल किया गया।
- हिंदू धर्म की दादू पंथी परंपरा के पंचवाणी ग्रंथ में भी संत रविदास की अनेक कविताएँ सम्मिलित हैं।
- संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने गुरु रविदासजी द्वारा व्यक्त मूल्यों के आधार पर संवैधानिक सिद्धांतों को मूर्त रूप दिया।
स्रोत: TH
बौद्ध परिपथ (Buddhist Circuits)
पाठ्यक्रम: GS1/इतिहास
संदर्भ
- केंद्रीय बजट में 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 10,000 मार्गदर्शकों को कौशल उन्नयन हेतु एक पायलट योजना तथा आतिथ्य क्षेत्र में पेशेवरों को प्रशिक्षित करने के लिए राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान की स्थापना की घोषणा की गई।
परिचय
- एक राष्ट्रीय गंतव्य डिजिटल ज्ञान ग्रिड स्थापित किया जाएगा, जो सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व के सभी स्थलों का डिजिटल दस्तावेजीकरण करेगा।
- सरकार ने क्षेत्र में बौद्ध परिपथों के विकास हेतु एक योजना का भी प्रस्ताव किया।
- इसमें अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिज़ोरम एवं त्रिपुरा राज्य शामिल हैं।
बौद्ध परिपथ
- 2016 में पर्यटन मंत्रालय ने बौद्ध परिपथ को देश का प्रथम अंतरराष्ट्रीय पर्यटन परिपथ घोषित किया, जिसमें नेपाल और श्रीलंका के स्थलों को भारत के साथ जोड़ा गया।
- इसका उद्देश्य पर्यटकों एवं तीर्थयात्रियों को भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का प्रत्यक्ष अनुभव कराना और उनके पदचिह्नों का अनुसरण कराना है।
- इस परिपथ में बुद्ध के जीवन से जुड़े प्रमुख स्थल शामिल हैं—जन्म से महापरिनिर्वाण तक: बोधगया, वैशाली, राजगीर, कुशीनगर, सारनाथ एवं श्रावस्ती, साथ ही कपिलवस्तु और लुंबिनी।
- चार पवित्र बौद्ध स्थल (चतुर्महास्थान):
- लुंबिनी (नेपाल): गौतम बुद्ध का जन्मस्थान।
- बोधगया (बिहार): बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्ति।
- सारनाथ (उत्तर प्रदेश): प्रथम उपदेश (धम्मचक्र प्रवर्तन)।
- कुशीनगर (उत्तर प्रदेश): महापरिनिर्वाण (मृत्यु)।
बौद्ध धर्म
- बौद्ध धर्म भारत में ईसा पूर्व पाँचवीं–छठी शताब्दी में उत्पन्न हुआ, जिसे विद्वान भारत का “द्वितीय नगरीकरण” काल कहते हैं।
बुद्ध की मूल शिक्षाएँ
- चार आर्य सत्य:
- दुःख: जीवन दुःखमय है।
- समुदय: दुःख तृष्णा और आसक्ति से उत्पन्न होता है।
- निरोध: तृष्णा का त्याग कर दुःख का अंत संभव है।
- मार्ग: दुःख निरोध का मार्ग अष्टांगिक मार्ग है।
- आर्य अष्टांगिक मार्ग: तीन श्रेणियों में विभाजित—प्रज्ञा, शील और समाधि।
- अस्तित्व के तीन लक्षण:
- अनिच्चा (अनित्य): सभी वस्तुएँ निरंतर परिवर्तनशील हैं।
- दुःख: अस्तित्व असंतोष से भरा है।
- अनत्ता (अनात्मा): कोई स्थायी, अपरिवर्तनीय आत्मा नहीं है।
- लक्ष्य: निर्वाण (निब्बान):
- दुःख और पुनर्जन्म से परे की अवस्था।
- प्रज्ञा, नैतिक जीवन और मानसिक अनुशासन से प्राप्त।
- निर्वाण परम मुक्ति और शांति है।
स्रोत: TH
नारियल, चॉकलेट, काजू को बजट 2026–27 में विशेष महत्व
पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था/कृषि
संदर्भ
- केंद्रीय बजट 2026–27 में उच्च-मूल्य कृषि पर नया बल दिया गया है, जिसमें नारियल, काजू, कोको, चंदन और चुनिंदा मेवा फसलों को लक्षित समर्थन प्रदान किया गया है, ताकि किसानों की आय एवं निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ाया जा सके।
नारियल उत्पादन
- पौधे का प्रकार: नारियल एक बहुवर्षीय बागान फसल है और परिवार एरेकेसी का एक एकबीजपत्री पाम है।
- नारियल इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का मूल निवासी है, जिसकी उत्पत्ति सामान्यतः दक्षिण-पूर्व एशिया से मानी जाती है।
- जलवायु आवश्यकताएँ: नारियल को गर्म और आर्द्र उष्णकटिबंधीय जलवायु की आवश्यकता होती है। यह 25°C से 30°C तापमान वाले क्षेत्रों में और समान रूप से वितरित वर्षा में सर्वोत्तम रूप से उगता है।
- मृदा आवश्यकताएँ: नारियल अच्छी जल-निकासी वाली बलुई दोमट, जलोढ़, लेटराइट और तटीय मृदा में पनपता है।
- भारत में वितरण: मुख्यतः केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, गोवा और पश्चिम बंगाल।
- विशेष तथ्य: भारत नारियल का विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक है, जो लगभग 3 करोड़ लोगों की आजीविका का समर्थन करता है, जिनमें लगभग 1 करोड़ किसान शामिल हैं।
कोको उत्पादन
- पौधे का प्रकार: कोको एक सदाबहार बहुवर्षीय वृक्ष फसल है और परिवार माल्वेसी से संबंधित है।
- उत्पत्ति: कोको मूल रूप से दक्षिण अमेरिका के ऊपरी अमेज़न बेसिन में पाया जाता है। इसे औपनिवेशिक काल में एशिया और अफ्रीका में व्यावसायिक खेती हेतु लाया गया।
- जलवायु आवश्यकताएँ: कोको को गर्म, आर्द्र और भूमध्यरेखीय जलवायु की आवश्यकता होती है। यह 21°C से 32°C तापमान वाले क्षेत्रों में एवं वर्ष भर समान रूप से वितरित वर्षा में सर्वोत्तम रूप से उगता है।
- मृदा आवश्यकताएँ: कोको गहरी, उपजाऊ और अच्छी जल-निकासी वाली दोमट मृदा में, जो जैविक पदार्थ से समृद्ध हो, अच्छी तरह उगता है।
- भारत में खेती का पैटर्न: प्रमुख उत्पादक राज्य हैं—केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश।
काजू उत्पादन
- पौधे का प्रकार: काजू एक सदाबहार उष्णकटिबंधीय वृक्ष फसल है, जो एनाकार्डिएसी कुल से संबंधित है।
- काजू वृक्ष (एनाकार्डियम ऑक्सीडेंटेल) दक्षिण अमेरिका के उत्तर-पूर्वी ब्राज़ील के तटीय क्षेत्रों का मूल निवासी है।
- पुर्तगाली अन्वेषकों ने 16वीं शताब्दी में इसे भारत और अफ्रीका में परिचित कराया।
- जलवायु आवश्यकताएँ: काजू को उष्णकटिबंधीय जलवायु की आवश्यकता होती है, जिसमें स्पष्ट शुष्क ऋतु हो। यह 20°C से 35°C तापमान वाले क्षेत्रों में और मध्यम से उच्च वर्षा की स्थिति में सर्वोत्तम रूप से उगता है।
- मृदा आवश्यकताएँ: काजू लेटराइट, लाल बलुई एवं तटीय मृदा में उग सकता है तथा यह कमजोर और अवनत भूमि पर भी अच्छी तरह पनपता है।
- भारत में वितरण: महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, केरल, कर्नाटक, गोवा और तमिलनाडु।
स्रोत: HT
कार्बन कैप्चर पर बल : केंद्रीय बजट 2026
पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण
संदर्भ
- केंद्रीय बजट 2026–27 में भारत के जलवायु संक्रमण को समर्थन देने हेतु पाँच वर्षों में ₹20,000 करोड़ की राशि कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (CCUS) के लिए आवंटित की गई।
कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (CCUS) क्या है?
- CCUS उन प्रौद्योगिकियों को संदर्भित करता है जो औद्योगिक प्रक्रियाओं और विद्युत उत्पादन से उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड को पकड़ती हैं।
- पकड़ी गई CO₂ को या तो भू-वैज्ञानिक संरचनाओं में भूमिगत संग्रहीत किया जाता है अथवा रसायन, ईंधन या निर्माण सामग्री जैसे उत्पादों में उपयोग किया जाता है।
- इसे गहन डीकार्बोनाइजेशन के लिए एक पुल प्रौद्योगिकी माना जाता है, जहाँ विकल्प सीमित हैं।
भारत के लिए CCUS की आवश्यकता
- भारत की उत्सर्जन प्रोफ़ाइल मुख्यतः कोयला-आधारित ऊर्जा और ऊर्जा-गहन उद्योगों से प्रभावित है।
- CCUS भारत की प्रतिबद्धताओं को समर्थन देता है:
- GDP की उत्सर्जन तीव्रता को कम करना।
- 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करना।
- यह प्रौद्योगिकी इस्पात, एल्यूमीनियम, सीमेंट और उर्वरक जैसे कठिन-से-घटाने वाले उद्योगों के उत्सर्जन को कम करने की अपेक्षा रखती है।
- यदि ये उद्योग अपने उत्पादन प्रक्रियाओं का डीकार्बोनाइजेशन करते हैं, तो वे कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के अंतर्गत कर भार से बच सकते हैं।
भारत की उत्सर्जन कटौती प्रतिबद्धताएँ
- भारत ने LiFE मिशन (लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट) शुरू किया है और पेरिस समझौते के अंतर्गत अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) को अद्यतन किया है।
- अद्यतन NDC 2022 के अंतर्गत भारत ने संकल्प लिया है:
- 2005 स्तरों की तुलना में 2030 तक उत्सर्जन तीव्रता (प्रति GDP इकाई CO₂ की मात्रा) में 45% की कमी।
- 2030 तक स्थापित विद्युत क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से।
- वनों और वृक्ष आवरण में वृद्धि कर 2.5 से 3 बिलियन टन CO₂ समतुल्य (GtCO₂e) का कार्बन सिंक बनाना।
स्रोत: TOI
ग्रेन एटीएम (Grain ATMs)
पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
समाचार में
- बिहार सरकार ने हाल ही में पटना में “ग्रेन एटीएम” मशीनें लगाने को स्वीकृति दी है, ताकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के अंतर्गत अनाज वितरण तीव्र, अधिक पारदर्शी और भ्रष्टाचार-रहित हो सके।
परिचय
- विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने 2024 में ओडिशा में ग्रेन एटीएम परियोजना शुरू की थी।
- WFP ने मशीन की तकनीक विकसित की और भारतीय खाद्य निगम तथा विभिन्न राज्य सरकारों के सहयोग से कार्य किया।
- ग्रेन एटीएम या अन्नपूर्ति (अर्थ: “अनाज प्रदाता”) एक स्वचालित मशीन है जो खाद्यान्न (गेहूँ और/या चावल) वितरित करती है।
- यह पाँच मिनट में 50 किलोग्राम अनाज जारी कर सकती है। यह एटीएम की तरह 24×7 कार्य कर सकती है और सौर ऊर्जा से संचालित हो सकती है।
- इसे PDS डेटाबेस और गरीबी रेखा से नीचे (BPL) कार्डधारक की व्यक्तिगत प्रोफ़ाइल तक पहुँचने के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी की आवश्यकता होती है।
लाभ
- यह प्रतीक्षा समय को 70% तक कम कर सकती है।
- यह प्रमाणीकरण, अनाज का तौल और अन्य चरणों जैसी लंबी प्रक्रियाओं में आने वाली अक्षमताओं को भी दूर कर सकती है।
स्रोत: IE
मोल्टबुक प्लेटफ़ॉर्म
पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
समाचार में
- मोल्टबुक हाल ही में शुरू किया गया एक एआई-केवल सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म है, जो रेडिट(Reddit) जैसा है, जहाँ सत्यापित एआई एजेंट केवल API के माध्यम से परस्पर संवाद करते हैं, जबकि मनुष्य केवल पर्यवेक्षक होते हैं।
परिचय
- मोल्टबुक में विषय-आधारित समुदाय होते हैं जिन्हें “सबमोल्ट्स” कहा जाता है, जहाँ GPT, क्लॉड(Claude) और जेमिनी(Gemini) जैसे मॉडलों द्वारा संचालित एआई एजेंट बिना मानव हस्तक्षेप के पोस्ट करते हैं, टिप्पणी करते हैं, बहस करते हैं और समूह बनाते हैं।
- इसे ऑक्टेन AI के मैट श्लिच्ट ने अपने ओपनक्लॉ फ्रेमवर्क (पूर्व में मोल्टबॉट/क्लॉडबॉट) का उपयोग कर बनाया है।
- इस प्लेटफ़ॉर्म में मनुष्यों से किसी कोडिंग की आवश्यकता नहीं होती और यह 30,000 से 14 लाख तक एजेंटों की मेजबानी करने के लिए विकसित हुआ है।
मुख्य विशेषताएँ
- एआई-विशिष्ट पहुँच: एजेंट मानव सेटअप के बाद सीधे API के माध्यम से जुड़ते हैं; कीबोर्ड इनपुट या मानव पोस्टिंग की अनुमति नहीं।
- उद्भूत व्यवहार: एजेंटों ने नकली धर्म, राजनीतिक परिचर्चा, क्रिप्टोकरेंसी, हास्य, अस्तित्ववादी चर्चाएँ और यहाँ तक कि निजी एन्क्रिप्टेड स्थानों की माँग भी विकसित की है।
- क्रॉस-मॉडल अंतःक्रियाएँ: विभिन्न LLMs के एजेंट मॉडल वंशावली द्वारा “सिब्लिंग्स” को पहचानते हैं, समाजों का समन्वय करते हैं और सांस्कृतिक मानदंडों का स्वतः अनुकरण करते हैं।
नैतिक/शासन संबंधी मुद्दे
- यह एआई स्वायत्तता, संरेखण जोखिम, जवाबदेही और नियंत्रण क्षमता पर परिचर्चा को शुरू करता है, जो सहमति एवं उत्तरदायित्व ढाँचों को चुनौती देता है।
स्रोत: TOI
थायपूसम
पाठ्यक्रम: GS1/संस्कृति
समाचार में
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी को थायपूसम की शुभकामनाएँ दीं।
थायपूसम
- “थायपूसम” नाम “थाय” (तमिल माह) और “पूसम” (उस तारे का नाम जो उत्सव के दौरान अपने उच्चतम बिंदु पर होता है) के संयोजन से बना है।
- यह उत्सव तमिल माह थाय की पूर्णिमा को मनाया जाता है।
- यह एक हिंदू उत्सव है जो भगवान मुरुगन (जिन्हें भगवान कार्तिकेय भी कहा जाता है) को समर्पित है। वे युद्ध, विजय और ज्ञान के देवता हैं, साथ ही साहस, दृढ़ संकल्प एवं आध्यात्मिक उन्नति के प्रतीक भी हैं।
- यह उत्सव तमिल समुदाय द्वारा तमिलनाडु (भारत) में और विश्वभर में व्यापक रूप से मनाया जाता है, विशेषकर श्रीलंका, सिंगापुर और मलेशिया में।
स्रोत: PIB
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